वह जो स्वयं को खोजता था : हेराक्लीटस की महानता और एकांत

फ्रांसीसी से अनुवादित

हेराक्लीटस एफ़ेसी हम तक, युगों की गहराई से, एक ऐसे ग्रंथ-पत्र के अंशों के माध्यम से पहुँचता है जो ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में आर्टेमिस के मंदिर में रखा गया था। आज भी इस बात पर बहस होती है कि वह ग्रंथ-पत्र एक सुसंगत निबंध था, अथवा वे विचार अलग-अलग थे, जैसे कि उद्धरणों की संयोगवश हम तक पहुँची सूक्तियाँ। जो भी हो, हेराक्लीटस ने वहाँ एक रहस्यवादी, संक्षिप्त और चकित कर देने वाली शैली में अभिव्यक्ति की; उसने एक साथ भविष्यवक्ता का स्वर और दार्शनिक की भाषा अपनाई। यहीं से उसके नाम के साथ बार-बार जोड़ा जाने वाला विशेषण “अंधकारमय” या “तमसाच्छन्न” (Σκοτεινός) आया, किंतु मुझे यह अतिशयोक्ति ही प्रतीत होती है : « निश्चय ही [उसका] पाठ कठोर और दुरूह है। रात्रि अंधकारमय है, तम सघन है। किंतु यदि कोई दीक्षित तुम्हारा मार्गदर्शन करे, तो तुम इस पुस्तक में पूर्ण सूर्यप्रकाश से भी अधिक स्पष्ट देखोगे » (यूनानी संकलन, पैलाटाइन पांडुलिपि के आधार पर)। उसके सिद्धांत के जो टुकड़े हमारे पास शेष हैं, वे किसी ऐसे तूफ़ान की बिजलियों के समान हैं जो रहस्यमय ढंग से लोप हो गया हो, और जिसने प्राक्-सुकरातीय रात्रि को किसी अन्य से अतुलनीय अग्नि से चीर दिया हो। हेगेल, « विचार के प्रकाश » के उद्गम का वर्णन करते हुए, हेराक्लीटस में सबसे दीप्तिमान केंद्रीय आकृति को पहचानते हैं। हाइडेगर इसे और आगे ले जाते हैं : « हेराक्लीटस को “अंधकारमय” कहा जाता है। किंतु वह प्रकाशमान है। क्योंकि वह उसे कहता है जो आलोकित करता है, उसके प्रकाश को विचार की भाषा में प्रवेश कराने का प्रयास करते हुए »1हाइडेगर, मार्टिन, Essais et Conférences (निबंध और व्याख्यान), जर्मन से फ़्रांसीसी अनुवाद : आंद्रे प्रेओ, ज़्याँ बोफ़्रे की प्रस्तावना, पेरिस : Gallimard, « Les Essais » संग्रह, 1958।

अस्वीकार की राजसत्ता

इस आभासी अस्पष्टता के साथ हेराक्लीटस में गर्व और अपने समकालीनों के प्रति तिरस्कार का एक गहरा भाव भी था। क्योंकि जब कोई दार्शनिक गर्वशील होता है, तो वह कभी अर्ध-गर्वशील नहीं होता। राजकुमार होने के नाते, उसने सहजता से राजकीय गरिमा अपने भाई को सौंप दी, फिर एक ऐसे नगर के लिए विधान बनाने से इनकार कर दिया जिसे वह अपरिवर्तनीय रूप से « एक दुष्ट संविधान के अधीन » (πονηρᾷ πολιτείᾳ) मानता था। इस प्रकार वह आर्टेमिस के मंदिर में एकांतवासी हो गया, बच्चों के साथ गिट्टियों का खेल खेलता हुआ। जब जिज्ञासु उसके चारों ओर एकत्र होते, तो वह उन पर फेंकता :

« आश्चर्य क्यों करते हो, दुष्टो? क्या यह करना तुम्हारे साथ नगर का जीवन जीने से उत्तम नहीं है? » (Τί, ὦ κάκιστοι, θαυμάζετε ; Ἢ οὐ κρεῖττον τοῦτο ποιεῖν ἢ μεθ’ ὑμῶν πολιτεύεσθαι ;)

दिओगेनेस लाएर्तियस, पुस्तक IX, यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : जाक ब्रुन्शविग, Vies et Doctrines des philosophes illustres (प्रसिद्ध दार्शनिकों के जीवन और सिद्धांत), मारी-ओदील गुले-काज़े के निर्देशन में अनूदित, पेरिस : Librairie générale française, « La Pochothèque » संग्रह, 1999।

यह ऋषि किसी की आवश्यकता नहीं रखता था, विद्वानों की संगति तक को तिरस्कृत करता था। फिर भी, वह कोई संवेदनहीन व्यक्ति नहीं था; और जब वह मानव अस्तित्व में बुने हुए दुखों से व्यथित होता, तो उसकी आँखों में अश्रु उमड़ आते। « मैंने स्वयं को खोजा » (Ἐδιζησάμην ἐμεωυτόν), वह स्वीकार करता है, मानो वही एकमात्र व्यक्ति हो जो डेल्फ़ी के उपदेश « अपने आप को जानो » को सच्चे अर्थों में साकार करता हो। नीत्शे इस आत्मनिर्भरता के पवित्र भय को अनुभव करेगा : « कोई अनुमान नहीं लगा सकता », शक्ति-संकल्प के दार्शनिक कहेंगे, « कि एकांत की वह अनुभूति कैसी रही होगी जो आर्टेमिस के मंदिर के एफ़ेसी संन्यासी में व्याप्त थी, यदि कोई स्वयं को सबसे निर्जन और सबसे जंगली पर्वत पर भय से जड़वत् न पाए »2नीत्शे, फ़्रीड्रिख, La Philosophie à l’époque tragique des Grecs (यूनानियों के दुखांतपूर्ण युग में दर्शन), जर्मन से फ़्रांसीसी अनुवाद : मिशेल आर और मार्क द लोने, Œuvres (कृतियाँ) में। I, मार्क द लोने के निर्देशन में अनूदित, पेरिस : Gallimard, « Bibliothèque de la Pléiade » संग्रह, 2000।

सार्वभौमिक प्रवाह का चक्कर

जबकि यूनानी विश्व के दूसरे छोर पर, एलिया का संप्रदाय सत्ता को हिमशिला-सी अचलता में जमा रहा था, हेराक्लीटस एकता की कल्पना एक सदा प्रवाहमान नदी के रूप में करता है, जो वही रहती है यद्यपि सदा भिन्न, नई लहरें बिना विराम पुरानी लहरों को अपने आगे धकेलती हुईं3इस रूपक से, हेराक्लीटस केवल यह नहीं कहता कि अस्तित्व विपत्तियों और पतन को अर्पित है, बल्कि यह कि कोई भी वस्तु यह या वह नहीं है : वह यह या वह बनती है। संसार क्यूकेओन (κυκεών) के समान है, वह मदिरा, कद्दूकस किए पनीर और जौ के आटे का मिश्रण, जिसकी गाढ़ी संगति अपनी एकता केवल हिलाने से बनाए रखती है। जब वह हिलाना बंद हो जाता है, तत्त्व अलग हो जाते हैं, भारी तत्त्व नीचे बैठ जाता है, और यह अनुष्ठानिक पेय अब नहीं रहता। इस प्रकार गति विपरीतों के मिलन का आधार सिद्ध होती है : « क्यूकेओन भी विघटित हो जाता है यदि उसे हिलाया न जाए » (Καὶ ὁ κυκεὼν διίσταται μὴ κινούμενος)।। स्थायित्व के सामान्य भ्रम के विरुद्ध, कुछ भी स्थिर नहीं है : « सब कुछ बहता है » (Πάντα ῥεῖ), « सब कुछ सतत-परिवर्तन है » (हेगेल), « सभी वस्तुएँ […] निरंतर डोलती हैं […]. मैं सत्ता को चित्रित नहीं करता। मैं संक्रमण को चित्रित करता हूँ » (मॉन्तेन)।

सभी वस्तुओं के इस प्रवाह का यह परिणाम है कि प्रत्येक वस्तु अपने विपरीत में परिवर्तित हो जाती है। यदि सत्ता केवल परिवर्तन में ही अस्तित्व रखती है, तो वह अनिवार्यतः दो विपरीत पदों के बीच का माध्यम है; प्रत्येक क्षण, हम उस अग्राह्य सीमा के समक्ष होते हैं जहाँ दो विरोधी गुण एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं। एक भयानक नियम जो स्वयं मनुष्य पर भी लागू होता है, जिसकी प्रत्येक अवस्था पूर्ववर्ती की मृत्यु है :

« क्या शिशु बालक में विलीन नहीं हो गया, और बालक किशोर में, युवक तरुण में, तरुण युवा पुरुष में, फिर […] प्रौढ़ वृद्ध में […] ? शायद […] प्रकृति हमें मौन रूप से यह सिखाती है कि अंतिम मृत्यु से भय न करें ? »

फ़ीलोन अलेक्ज़ांद्रिया का, De Iosepho (योसेफ़ के विषय में), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ लापोर्त, पेरिस : Éditions du Cerf, « Les Œuvres de Philon d’Alexandrie » संग्रह, 1964।

ब्रह्मांडीय क्रीड़ा का सौंदर्यशास्त्र

जीवन की एक दुखांतपूर्ण स्वीकृति की खोज में, नीत्शे एफ़ेसस के इस संन्यासी को अपना निकटतम पूर्वज बनाएगा। « संसार को, सत्य की अपनी शाश्वत आवश्यकता में, […] शाश्वत रूप से हेराक्लीटस की आवश्यकता है », वह घोषित करेगा। और अन्यत्र :

« […] हेराक्लीटस की संगति मुझे किसी भी अन्य से अधिक सहज और आश्वस्त करती है। अनित्यता और विनाश के प्रति सहमति; विरोधाभास और युद्ध को कहा गया “हाँ”; सतत-परिवर्तन, जिसमें “सत्ता” की धारणा को ही अस्वीकार करना निहित है — इसमें मुझे […] अपने सबसे निकट के विचार को पहचानना होगा जो कभी सोचा गया। »

नीत्शे, फ़्रीड्रिख, L’Antéchrist (प्रतिमसीह), उसके बाद Ecce homo, जर्मन से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ-क्लोद एमरी, पेरिस : Gallimard, « Folio » संग्रह, 1974।

जो बात जर्मन दार्शनिक को वहाँ सबसे अधिक मिलेगी, वह है शोपेनहावर के निराशावाद का प्रतिविष। कथित दोषों, अन्यायों, विरोधाभासों, कष्टों के जुए तले झुकने से कोसों दूर, वास्तविकता समस्त नैतिकता से मुक्त हो जाती है : वह « एक खेलता हुआ बालक है, जो मोहरे आगे बढ़ाता है : बालक का राज्य » (παῖς […] παίζων, πεσσεύων· παιδὸς ἡ βασιληίη)। यदि हेराक्लीटस आर्टेमिस के मंदिर में कोलाहल करते बच्चों के खेल में सम्मिलित होता था, तो इसलिए कि वह वहाँ पहले से ही « विश्व-शिशु महान के खेल » पर चिंतन कर रहा था, अर्थात् ईश्वर। शक्ति-संकल्प यहाँ नीत्शे के मन में आकार लेता है : एक कलाकार-शक्ति जो निर्माण करती है और विनाश करती है, एक बालक की उदात्त निर्दोषता के साथ जो यहाँ-वहाँ कुछ कंकड़ रखता है, या रेत के ढेर बनाकर उन्हें फिर से गिरा देता है, शुभ और अशुभ के पार। यह अंधकारमय के ही पदचिह्नों में है कि नीत्शे « प्रतिमसीह बनने को तैयार होता है, अर्थात् वह जो विश्व के नैतिक अर्थ को अस्वीकार करता है »।


आगे की खोज के लिए

Héraclite : la lumière de l’Obscur (हेराक्लीटस : अंधकार का प्रकाश) के इर्दगिर्द

उद्धरण

« Ἀκοῦσαι οὐκ ἐπιστάμενοι οὐδ᾽ εἰπεῖν. • Ψυχῆς πείρατα ἰὼν οὐκ ἂν ἐξεύροιο πᾶσαν ἐπιπορευόμενος ὁδόν· οὕτω βαθὺν λόγον ἔχει. • Ποταμοῖς τοῖς αὐτοῖς ἐμβαίνομέν τε καὶ οὐκ ἐμβαίνομεν, εἶμέν τε καὶ οὐκ εἶμεν. »

Αποσπάσματα (Ηράκλειτος), Wikisource ελληνικά पर, [ऑनलाइन], 22 फ़रवरी 2026 को परामर्शित।

« न तो सुनने में दक्ष, वे बोलना भी नहीं जानते। • आत्मा की सीमाएँ तुम नहीं पाओगे, भले ही सभी मार्गों पर चलो, इतना गहन है उसका लोगोस। • हम एक ही नदियों में प्रवेश करते हैं और नहीं करते; हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Héraclite : la lumière de l’Obscur (हेराक्लीटस : अंधकार का प्रकाश), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ बुशार दोर्वाल, कॉन्स्तांतिन फ़ोतिनास की प्रस्तावना। मॉन्ट्रियल : Éditions du Roseau, 1997 ; पुनर्मुद्रण, गोर्द : Les Éditions du Relié, « Poche » संग्रह, 2007।

« न सुनना जानते, न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ तुम नहीं पाओगे, भले ही सभी मार्गों पर चलो, इतना गहन वचन (λόγον) वह रखती है। • हम एक ही नदियों में प्रवेश करते हैं और नहीं करते; हम (उनमें) हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Fragments (खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : मार्सेल कोंश, पेरिस : Presses universitaires de France, « Épiméthée » संग्रह, 1986 ; Fragments recomposés : présentés dans un ordre rationnel (पुनर्रचित खंड : तर्कसंगत क्रम में प्रस्तुत) शीर्षक से पुनर्मुद्रण, पेरिस : PUF, 2017।

« वे न सुनना जानते हैं, न बोलना। • भले ही तुम सभी मार्गों पर चलो, तुम आत्मा की सीमाएँ कभी नहीं पाओगे, इतना गहन है उसका ज्ञान। • हम एक ही नदियों में उतरते हैं और नहीं उतरते; हम उनमें हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Fragments : citations et témoignages (खंड : उद्धरण और साक्ष्य), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ-फ़्रांसुआ प्रादो, पेरिस : Flammarion, « GF » संग्रह, 2002।

« वे न सुनना जानते हैं, न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ, अपनी यात्रा में, तुम उन्हें नहीं पाओगे, भले ही तुम पूरा मार्ग तय करो
इतना लंबा हो चाहे हर रास्ता
इतना गहन है वह लोगोस जो वह समाहित करती है। • एक ही नदियों में
हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते
हम हैं और नहीं हैं। »

ड्यूमों, ज़्याँ-पॉल (सं.), Les Présocratiques (प्राक्-सुकरातीय दार्शनिक), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ-पॉल ड्यूमों, दानिएल देलात्र और ज़्याँ-लुई प्वारिए के सहयोग से, पेरिस : Gallimard, « Bibliothèque de la Pléiade » संग्रह, 1988।

« सुनने में असमर्थ, बोलने में (भी) असमर्थ। • और आत्मा की सीमाएँ, जहाँ तुम जाते हो, बिलकुल नहीं पाओगे, भले ही तुम सभी मार्गों पर चलो, इतना गहन है उसका लोगोस। • एक ही नदियों में हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Héraclite d’Éphèse, les vestiges (एफ़ेसी हेराक्लीटस, अवशेष)। III.3.B/i, Les Fragments du livre d’Héraclite (हेराक्लीटस की पुस्तक के खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : सेर्ज मुराव्योव [सर्गेई निकितिच मुराव्योव], सांक्ट आउगूस्तिन : Academia Verlag, « Heraclitea » संग्रह, 2006।

« ये लोग जो न सुनना जानते हैं न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ, तुम उन तक नहीं पहुँच सकते, भले ही पूरा मार्ग तय करो, इतना गहन लोगोस वह रखती है। • एक ही नदियों में, हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Les Fragments d’Héraclite (हेराक्लीटस के खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : रोजे म्यूनिए, तूलूज़ : Fata Morgana, « Les Immémoriaux » संग्रह, 1991।

« मनुष्यो, जो सुनते और बोलते हैं बिना जाने। • आत्मा की सीमाएँ, तुम उन तक नहीं पहुँच सकते, चाहे सभी मार्गों पर तुम्हारे क़दम तुम्हें कितनी भी दूर ले जाएँ : इतनी गहन है वह वाणी जो उसमें निवास करती है। • हम एक ही नदियों में प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

बात्तिस्तिनी, ईव (सं.), Trois Contemporains : Héraclite, Parménide, Empédocle (तीन समकालीन : हेराक्लीटस, पार्मेनीदेस, एम्पेदोक्लेस), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ईव बात्तिस्तिनी, पेरिस : Gallimard, « Les Essais » संग्रह, 1955 ; Trois Présocratiques (तीन प्राक्-सुकरातीय दार्शनिक) शीर्षक से विस्तारित पुनर्मुद्रण, पेरिस : Gallimard, « Idées » संग्रह, 1968।

« वे न सुनना जानते हैं न बोलना। • [अंतराल] • हम एक ही नदी में उतरते हैं और नहीं उतरते, हम हैं और नहीं हैं। »

तानरी, पॉल, Pour l’histoire de la science hellène : de Thalès à Empédocle (यूनानी विज्ञान के इतिहास के लिए : थेलीस से एम्पेदोक्लेस तक), पेरिस : F. Alcan, 1887 ; पुनर्मुद्रण (फ़ेदेरीगो एनरीकेस की प्रस्तावना), पेरिस : Gauthier-Villars, 1930।

« ये लोग जो न सुनना जानते हैं न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ नहीं पाई जा सकतीं, चाहे कोई भी मार्ग अपनाओ, इतनी गहराई में वे धँसी हुई हैं। • हम एक ही नदी में उतरते हैं और नहीं उतरते; हम हैं और नहीं हैं। »

व्वालकैं, ज़्याँ (सं.), Les Penseurs grecs avant Socrate : de Thalès de Milet à Prodicos (सुकरात से पहले के यूनानी विचारक : मिलेतुस के थेलीस से प्रोदिकोस तक), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ व्वालकैं, पेरिस : Librairie Garnier Frères, « Classiques Garnier » संग्रह, 1941 ; पुनर्मुद्रण, पेरिस : Garnier-Flammarion, « GF » संग्रह, 1964।

« सुनने में असमर्थ, बोलने में भी असमर्थ। • “प्सूखे” (आत्मा) की सीमाएँ उसकी यात्रा में, वह उन्हें नहीं पाएगा, जो सभी मार्ग अपनाएगा : उसका इतना गहन लोगोस है। • एक ही नदियों में, हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Fragments (खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : फ़्रेदेरिक रूसिय, एलियान गायार और फ़्रांसुआ बार्बू के सहयोग से, पेरिस : Éditions Findakly, 1984।

« आनंद यहाँ है, किंतु कुछ लोग न उसे देखना जानते हैं न सुनना। • तुम प्राणशक्ति (“प्सूखे”) की सीमाएँ कभी नहीं पाओगे, भले ही सभी मार्गों पर चलो, क्योंकि उसके आनंद की परमानंद अनंत है। • हम एक ही नदियों में प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Les Fragments d’Héraclite (हेराक्लीटस के खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : गी मासा, [स्यूसी-आँ-ब्री] : Anfortas, 2018।

« न सुनना जानते, न बोलना। • [अंतराल] • एक ही नदियों में, हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते; हम हैं और नहीं हैं। »

प्लाज़ने, लॉरांस (सं.), Anthologie de la littérature grecque : de Troie à Byzance (यूनानी साहित्य का संकलन : ट्रॉय से बीजांतियम तक), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : एमान्युएल ब्लाँ, [पेरिस] : Gallimard, « Folio Classique » संग्रह, 2020।

« न सुनना जानते न बोलना। • आत्मा के छोर, अपनी गति में, तुम उन्हें नहीं पाओगे, भले ही हर मार्ग पर चलो; वह इतना गहन लोगोस समाहित करती है। • एक ही नदियों में हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

आक्सेलोस, कोस्तास, Héraclite et la Philosophie : la première saisie de l’être en devenir de la totalité (हेराक्लीटस और दर्शन : समग्रता के सतत-परिवर्तनशील सत्ता का प्रथम ग्रहण), पेरिस : Les Éditions de Minuit, « Arguments » संग्रह, 1962।

« वे न सुनना जानते हैं, न बोलना। • आत्मा की सीमा तुम नहीं पाओगे, भले ही सभी मार्गों पर यात्रा करो, इतना गहन लोगोस उसका है। • हम एक ही नदियों में प्रवेश करते हैं और नहीं करते। हम हैं और नहीं हैं। »

रामनू, क्लेमांस, Héraclite ou l’homme entre les choses et les mots (हेराक्लीटस अथवा वस्तुओं और शब्दों के बीच का मनुष्य), मोरिस ब्लांशो की प्रस्तावना, पेरिस : Les Belles Lettres, « Collection d’études anciennes » संग्रह, 1959।

« जैसे वे सुनना नहीं जानते, वैसे ही बोलना भी नहीं। • प्राणवायु की सीमाएँ, वह उन्हें अपने मार्ग पर नहीं पाएगा, वह व्यक्ति जो सभी मार्ग अपनाएगा। इतनी गहन है वह युक्ति जो वह धारण करता है। • एक ही नदियों में, हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Héraclite ou la séparation (हेराक्लीटस अथवा पृथक्करण), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ज़्याँ बोलाक और हाइन्त्स विस्मान। पेरिस : Les Éditions de Minuit, « Le Sens commun » संग्रह, 1972।

« वे सुनने में उतने ही असमर्थ हैं जितने बोलने में। • आत्मा का चरम बिंदु, कोई चलकर उस तक नहीं पहुँच सकता, भले ही मार्ग के अंत तक जाए। क्योंकि मूल कारण उसमें गहराई तक विस्तृत है। • एक ही नदियों में हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते। जैसे हम अस्तित्व रखते हैं और नहीं रखते। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Les Fragments (खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : सिमोन ज़ाकमार, उसके बाद उन्हीं का Héraclite d’Éphèse ou le flamboiement de l’Obscur (एफ़ेसी हेराक्लीटस अथवा अंधकार की ज्वाला), पेरिस : Arfuyen, « Ombre » संग्रह, 2003।

« न सुनना जानते न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ तुम नहीं पा सकते,
भले ही तुम सभी मार्गों पर चलो,
इतना गहन लोगोस वह छिपाए रखती है। • एक ही नदियों में हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते,
हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Éclats d’horizon : 150 fragments d’Héraclite d’Éphèse (क्षितिज की किरणें : एफ़ेसी हेराक्लीटस के 150 खंड), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : लिंडा रासोआमानाना, ईव बात्तिस्तिनी की प्रस्तावना, नांत : Éd. Amalthée, 2007।

« न सुनना जानते
न बोलना। • आत्मा के छोर
वह उन्हें नहीं पाएगा
जो सभी मार्गों पर चलेगा
इतना गहन है वह लोगोस जो वह संचित करती है। • एक ही नदियों में
हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते
हम हैं और नहीं हैं। »

ओरिए, ब्लेज़, Héraclite ou la philosophie (हेराक्लीटस अथवा दर्शन), पेरिस : L’Harmattan, « Ouverture philosophique » संग्रह, 2011।

« वे न सुनना जानते हैं, न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ, चाहे तुम किसी भी मार्ग पर चलो, तुम उन्हें नहीं पा सकते, इतना गहन तर्क वह समाहित करती है। • हम एक ही नदी में उतरते हैं और नहीं उतरते, हम हैं और नहीं हैं। »

हेराक्लीटस एफ़ेसी, Doctrines philosophiques (दार्शनिक सिद्धांत), यूनानी से फ़्रांसीसी अनुवाद : मोरिस सोलोवीन, पेरिस : F. Alcan, 1931।

« [अंतराल] • आत्मा की सीमाएँ नहीं पाई जा सकतीं, भले ही पूरा मार्ग तय करो, इतना गहन λόγος उसका है। • एक ही नदियों में हम प्रवेश करते हैं और नहीं करते, हम हैं और नहीं हैं। »

वेय, सिमोन, La Source grecque (यूनानी स्रोत), पेरिस : Gallimard, « Espoir » संग्रह, 1953।

« न सुनना जानते न बोलना। • आत्मा की सीमाएँ तुम नहीं पाओगे, चाहे किसी भी दिशा में यात्रा करो, इतनी गहन है उसकी माप। • हम एक ही नदियों में उतरते हैं और नहीं उतरते; हम हैं और नहीं हैं। »

बर्नेट, जॉन, L’Aurore de la philosophie grecque (यूनानी दर्शन की उषा), अंग्रेज़ी से फ़्रांसीसी अनुवाद : ओगुस्त रेमों, पेरिस : Payot & Cie, 1919।

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मुद्रित कृतियाँ

ग्रंथसूची

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  • बोफ़्रे, ज़्याँ, Dialogue avec Heidegger (हाइडेगर के साथ संवाद)। I, Philosophie grecque (यूनानी दर्शन), पेरिस : Les Éditions de Minuit, « Arguments » संग्रह, 1973।
  • बुशार दोर्वाल, ज़्याँ, Civilisation profane : la perte du sacré (लौकिक सभ्यता : पवित्र की हानि), मॉन्ट्रियल : Éditions du Roseau, 1987।
  • कांतैं-ब्रो, आंत्वान, Penser le néant : Hegel, Heidegger et l’épreuve héraclitéenne (शून्यता पर चिंतन : हेगेल, हाइडेगर और हेराक्लीटीय परीक्षा), क्वेबेक : Presses de l’Université Laval, « Zêtêsis » संग्रह, 2018।
  • देशार्नो, बेर्नार और इनोव्लोत्स्की, साब्रीना, Philon d’Alexandrie : un penseur à l’intersection des cultures gréco-romaine, orientale, juive et chrétienne (अलेक्ज़ांद्रिया का फ़ीलोन : यूनानी-रोमन, प्राच्य, यहूदी और ईसाई संस्कृतियों के संगम पर एक विचारक), ब्रुसेल्स : E.M.E., 2009।
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  • त्सेलर, एदुआर, La Philosophie des Grecs considérée dans son développement historique (यूनानियों का दर्शन उसके ऐतिहासिक विकास में) द्वितीय भाग, Les Éléates, Héraclite, Empédocle, les Atomistes, Anaxagore, les Sophistes (एलियावादी, हेराक्लीटस, एम्पेदोक्लेस, परमाणुवादी, अनक्सागोरास, सोफ़िस्ट), जर्मन से फ़्रांसीसी अनुवाद : एमील बूत्रू, पेरिस : Hachette, 1882। (Google Livres)।
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Yoto Yotov

2010 से, मैं अपना समय सदियों और राष्ट्रों के बीच संवाद को बढ़ावा देने में लगा रहा हूँ, इस विश्वास के साथ कि मानव आत्मा हर जगह अपने घर में है। यदि आप एक सार्वभौमिक संस्कृति की इस दृष्टि को साझा करते हैं, और यदि मेरे Notes du mont Royal ने कभी आपको प्रबुद्ध या प्रभावित किया है, तो कृपया Liberapay पर दान करने पर विचार करें।

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